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हिंदी भाषा - राष्ट्र भाषा
Monday, July 27, 2020
पाठ - 2 - हम सब सुमन एक उपवन के
*हम सब सुमन एक उपवन के - एक हमारी धर्ती सबकी , जिस्की मिट्टी से जन्मे हम । मिली न एक ही धूप हमें है , सींचे जाए एक जल से हम ।पले हुए है झूल - झूलकर पलनों में हम , एक पवन के । हम सब सुमन एक उपवन कै ....... ।
*
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पाठ - 2 - हम सब सुमन एक उपवन के
पहली पंक्ति - हम सब सुमन एक उपवन के
दुसरी पंक्ति -- हम सब सुमन एक उपवन के
तीसरी पंक्ति - हम सब सुमन एक उपवन की
अभ्यास
अभ्यास -समानार्थ कविता से चुनकर लिखे ।
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कविता का रचयिता
हम सब सुमन एक उपवन के - മലയാള പരിഭാഷ.
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