Monday, July 27, 2020

पाठ - 2 - हम सब सुमन एक उपवन के

*हम सब सुमन एक उपवन के - एक हमारी धर्ती सबकी , जिस्की मिट्टी से जन्मे हम । मिली न एक ही धूप हमें है ,  सींचे जाए एक जल से हम ।पले हुए है  झूल - झूलकर पलनों में हम , एक पवन के ।  हम सब सुमन एक उपवन कै ....... । *

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