Monday, July 27, 2020

तीसरी पंक्ति - हम सब सुमन एक उपवन की

*सूरज एक हमारा जिसकी,किरणें उसकी कली खिलाती । एक हमारा चांद ,चांदनी जिसकी हम सबको नहलाती । मिले एक से स्वर हमको है, भ्रमरों के मीठे गुंजन से । हम सब सुमन एक उपवन के ।........*

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एक ही सूरज की किरणें ही उपवन की कालियों को खिलाती है।
एक ही चांद की चाँदनी हमको नहलाती है।
भ्रमरों के मीठे गुंजन से हमें एक से स्वर मिले है।


ഒരേ സൂര്യകിരണങ്ങൾ നമ്മുടെ മൊട്ടുകൾ വിരിയിക്കുന്നു.നാം ഒരേ നിലാവിൽ കുളിക്കുന്നു.വണ്ടുകളുടെ മധുരഗാനം നാം ഒരുപോലെ കേൾക്കുന്നു.


सूरज की किरणें 


कलियां 


हम एक चांद की चांदनी में नहलाती है ।

                                                              
भ्रमर देखें

हम सब सुमन एक उपवन के


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